पंचांग 20 सितंबर 2011
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 सितंबर 2011 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:33
चंद्रोदय00:05 (21 सित॰)
चंद्रास्त12:44
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1933 · विक्रम (चैत्रादि) 2068
- संवत्सर:
- खर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृषभ 12:56 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 06:34 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 07:30 (21 सित॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 01:42 (21 सित॰) तक, फिर आर्द्रा 02:39 (22 सित॰) तक
- योग
- सिद्धि 13:34 तक, फिर व्यतीपात 13:06 (21 सित॰) तक
- करण
- बव 06:34 तक, फिर बालव 19:08 तक, फिर कौलव 07:30 (21 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:52
- राहु काल15:30 – 17:01
- यमगंड09:25 – 10:56
- गुलिक काल12:28 – 13:59
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
- चर(सामान्य)09:25 – 10:56
- लाभ(शुभ)10:56 – 12:28
- अमृत(शुभ)12:28 – 13:59
- काल(वर्जित (परंपरा))13:59 – 15:30
- शुभ(शुभ)15:30 – 17:01
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:01 – 18:33
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:33 – 20:01
- लाभ(शुभ)20:01 – 21:30
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:30 – 22:59
- शुभ(शुभ)22:59 – 00:28 (21 सित॰)
- अमृत(शुभ)00:28 (21 सित॰) – 01:56 (21 सित॰)
- चर(सामान्य)01:56 (21 सित॰) – 03:25 (21 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (21 सित॰) – 04:54 (21 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (21 सित॰) – 06:23 (21 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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