पंचांग 1 अप्रैल 2012

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 अप्रैल 2012 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:28
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय13:36
चंद्रास्त02:43 (2 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1934 · विक्रम (चैत्रादि) 2069
संवत्सर:
नंदन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल नवमी 14:08 तक, फिर शुक्ल दशमी 13:41 (2 अप्रैल) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 09:12 तक, फिर पुष्य 09:35 (2 अप्रैल) तक
योग
अतिगण्ड 07:16 तक, फिर सुकर्मा 06:01 (2 अप्रैल) तक, फिर धृति 04:05 (3 अप्रैल) तक
करण
कौलव 14:08 तक, फिर तैतिल 02:01 (2 अप्रैल) तक, फिर गर 13:41 (2 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:03
  • राहु काल17:15 – 18:48
  • यमगंड12:38 – 14:10
  • गुलिक काल15:43 – 17:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:28 – 08:01
  • चर(सामान्य)08:01 – 09:33
  • लाभ(शुभ)09:33 – 11:06
  • अमृत(शुभ)11:06 – 12:38
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:10
  • शुभ(शुभ)14:10 – 15:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:48

रात

  • शुभ(शुभ)18:48 – 20:15
  • अमृत(शुभ)20:15 – 21:43
  • चर(सामान्य)21:43 – 23:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:10 – 00:38 (2 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:38 (2 अप्रैल) – 02:05 (2 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)02:05 (2 अप्रैल) – 03:32 (2 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:32 (2 अप्रैल) – 05:00 (2 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)05:00 (2 अप्रैल) – 06:27 (2 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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