पंचांग 20 सितंबर 2012
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 सितंबर 2012 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:32
चंद्रोदय10:25
चंद्रास्त21:57
- मास:
- भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1934 · विक्रम (चैत्रादि) 2069
- संवत्सर:
- नंदन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- तुला 12:07 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल पंचमी 18:41 तक, फिर शुक्ल षष्ठी 16:17 (21 सित॰) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 17:40 तक, फिर अनुराधा 16:02 (21 सित॰) तक
- योग
- वैधृति 06:23 तक, फिर विष्कम्भ 03:14 (21 सित॰) तक, फिर प्रीति 00:14 (22 सित॰) तक
- करण
- बव 07:57 तक, फिर बालव 18:41 तक, फिर कौलव 05:27 (21 सित॰) तक, फिर तैतिल 16:17 (21 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:52
- राहु काल13:58 – 15:30
- यमगंड06:23 – 07:54
- गुलिक काल09:25 – 10:56
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:23 – 07:54
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:56
- चर(सामान्य)10:56 – 12:27
- लाभ(शुभ)12:27 – 13:58
- अमृत(शुभ)13:58 – 15:30
- काल(वर्जित (परंपरा))15:30 – 17:01
- शुभ(शुभ)17:01 – 18:32
रात
- अमृत(शुभ)18:32 – 20:01
- चर(सामान्य)20:01 – 21:30
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:30 – 22:58
- काल(वर्जित (परंपरा))22:58 – 00:27 (21 सित॰)
- लाभ(शुभ)00:27 (21 सित॰) – 01:56 (21 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:56 (21 सित॰) – 03:25 (21 सित॰)
- शुभ(शुभ)03:25 (21 सित॰) – 04:54 (21 सित॰)
- अमृत(शुभ)04:54 (21 सित॰) – 06:23 (21 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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