पंचांग 12 दिसंबर 2012

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 दिसंबर 2012 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:57
सूर्यास्त17:59
चंद्रोदय06:40 (13 दिस॰)
चंद्रास्त17:05
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1934 · विक्रम (चैत्रादि) 2069
संवत्सर:
नंदन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 17:55 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 14:11 (13 दिस॰) तक
नक्षत्र
अनुराधा 20:47 तक, फिर ज्येष्ठा 17:48 (13 दिस॰) तक
योग
धृति 01:16 (13 दिस॰) तक, फिर शूल 20:57 (13 दिस॰) तक
करण
विष्टि 07:45 तक, फिर शकुनि 17:55 तक, फिर चतुष्पद 04:04 (13 दिस॰) तक, फिर नाग 14:11 (13 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:50परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:28 – 13:51
  • यमगंड08:20 – 09:42
  • गुलिक काल11:05 – 12:28

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:57 – 08:20
  • अमृत(शुभ)08:20 – 09:42
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:42 – 11:05
  • शुभ(शुभ)11:05 – 12:28
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:28 – 13:51
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:51 – 15:13
  • चर(सामान्य)15:13 – 16:36
  • लाभ(शुभ)16:36 – 17:59

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:59 – 19:36
  • शुभ(शुभ)19:36 – 21:14
  • अमृत(शुभ)21:14 – 22:51
  • चर(सामान्य)22:51 – 00:28 (13 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:28 (13 दिस॰) – 02:05 (13 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:05 (13 दिस॰) – 03:43 (13 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)03:43 (13 दिस॰) – 05:20 (13 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:20 (13 दिस॰) – 06:57 (13 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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