पंचांग 19 मार्च 2013
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 मार्च 2013 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:39
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय11:52
चंद्रास्त01:13 (20 मार्च)
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1934 · विक्रम (चैत्रादि) 2069
- संवत्सर:
- नंदन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- वृषभ 12:20 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल सप्तमी 09:38 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 12:11 (20 मार्च) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 01:51 (20 मार्च) तक, फिर आर्द्रा 04:44 (21 मार्च) तक
- योग
- आयुष्मान 22:05 तक, फिर सौभाग्य 22:56 (20 मार्च) तक
- करण
- वणिज 09:38 तक, फिर विष्टि 22:56 तक, फिर बव 12:11 (20 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:06
- राहु काल15:43 – 17:14
- यमगंड09:41 – 11:11
- गुलिक काल12:42 – 14:13
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:39 – 08:10
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:10 – 09:41
- चर(सामान्य)09:41 – 11:11
- लाभ(शुभ)11:11 – 12:42
- अमृत(शुभ)12:42 – 14:13
- काल(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:43
- शुभ(शुभ)15:43 – 17:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:45
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:45 – 20:14
- लाभ(शुभ)20:14 – 21:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:12
- शुभ(शुभ)23:12 – 00:42 (20 मार्च)
- अमृत(शुभ)00:42 (20 मार्च) – 02:11 (20 मार्च)
- चर(सामान्य)02:11 (20 मार्च) – 03:40 (20 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:40 (20 मार्च) – 05:09 (20 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:09 (20 मार्च) – 06:38 (20 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें