पंचांग 10 अप्रैल 2013
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 अप्रैल 2013 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:53
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1934 · विक्रम (चैत्रादि) 2069
- संवत्सर:
- नंदन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मीन 21:28 तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 15:05 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 15:58 (11 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- रेवती 21:28 तक, फिर अश्विनी 23:06 (11 अप्रैल) तक
- योग
- वैधृति 02:58 (11 अप्रैल) तक, फिर विष्कम्भ 02:49 (12 अप्रैल) तक
- करण
- नाग 15:05 तक, फिर किंस्तुघ्न 03:28 (11 अप्रैल) तक, फिर बव 15:58 (11 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:00परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:35 – 14:09
- यमगंड07:55 – 09:28
- गुलिक काल11:02 – 12:35
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:21 – 07:55
- अमृत(शुभ)07:55 – 09:28
- काल(वर्जित (परंपरा))09:28 – 11:02
- शुभ(शुभ)11:02 – 12:35
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:35 – 14:09
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:16
- लाभ(शुभ)17:16 – 18:50
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:50 – 20:16
- शुभ(शुभ)20:16 – 21:42
- अमृत(शुभ)21:42 – 23:09
- चर(सामान्य)23:09 – 00:35 (11 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:35 (11 अप्रैल) – 02:01 (11 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:01 (11 अप्रैल) – 03:28 (11 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)03:28 (11 अप्रैल) – 04:54 (11 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (11 अप्रैल) – 06:20 (11 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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