पंचांग 17 जुलाई 2013
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 जुलाई 2013 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:07
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय13:45
चंद्रास्त01:26 (18 जुल॰)
- मास:
- आषाढ़ (अमांत)
- संवत:
- शक 1935 · विक्रम (चैत्रादि) 2070
- संवत्सर:
- विजय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल नवमी 18:49 तक, फिर शुक्ल दशमी 16:42 (18 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- स्वाती 20:25 तक, फिर विशाखा 19:02 (18 जुल॰) तक
- योग
- साध्य 23:56 तक, फिर शुभ 21:04 (18 जुल॰) तक
- करण
- बालव 07:39 तक, फिर कौलव 18:49 तक, फिर तैतिल 05:51 (18 जुल॰) तक, फिर गर 16:42 (18 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:40 – 14:19
- यमगंड07:45 – 09:23
- गुलिक काल11:02 – 12:40
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:07 – 07:45
- अमृत(शुभ)07:45 – 09:23
- काल(वर्जित (परंपरा))09:23 – 11:02
- शुभ(शुभ)11:02 – 12:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:19
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:19 – 15:57
- चर(सामान्य)15:57 – 17:35
- लाभ(शुभ)17:35 – 19:14
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:35
- शुभ(शुभ)20:35 – 21:57
- अमृत(शुभ)21:57 – 23:19
- चर(सामान्य)23:19 – 00:40 (18 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (18 जुल॰) – 02:02 (18 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:02 (18 जुल॰) – 03:24 (18 जुल॰)
- लाभ(शुभ)03:24 (18 जुल॰) – 04:45 (18 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:45 (18 जुल॰) – 06:07 (18 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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