पंचांग 25 सितंबर 2013

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 सितंबर 2013 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:28
चंद्रोदय22:54
चंद्रास्त11:24
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1935 · विक्रम (चैत्रादि) 2070
संवत्सर:
विजय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 17:56 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 20:12 (26 सित॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 23:30 तक, फिर मृगशीर्ष 02:21 (27 सित॰) तक
योग
सिद्धि 01:47 (26 सित॰) तक, फिर व्यतीपात 02:36 (27 सित॰) तक
करण
वणिज 17:56 तक, फिर विष्टि 07:02 (26 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:50परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:26 – 13:56
  • यमगंड07:54 – 09:25
  • गुलिक काल10:55 – 12:26

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:23 – 07:54
  • अमृत(शुभ)07:54 – 09:25
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:55
  • शुभ(शुभ)10:55 – 12:26
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:26 – 13:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:56 – 15:27
  • चर(सामान्य)15:27 – 16:57
  • लाभ(शुभ)16:57 – 18:28

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:28 – 19:57
  • शुभ(शुभ)19:57 – 21:27
  • अमृत(शुभ)21:27 – 22:56
  • चर(सामान्य)22:56 – 00:26 (26 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:26 (26 सित॰) – 01:55 (26 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:55 (26 सित॰) – 03:25 (26 सित॰)
  • लाभ(शुभ)03:25 (26 सित॰) – 04:54 (26 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (26 सित॰) – 06:24 (26 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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