पंचांग 15 जनवरी 2014
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 जनवरी 2014 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:18
चंद्रोदय17:45
चंद्रास्त06:56 (16 जन॰)
- मास:
- पौष (अमांत)
- संवत:
- शक 1935 · विक्रम (चैत्रादि) 2070
- संवत्सर:
- विजय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- मिथुन 06:29 (16 जन॰) तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्दशी 07:50 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 10:22 (16 जन॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 10:17 तक, फिर पुनर्वसु 13:14 (16 जन॰) तक
- योग
- वैधृति 03:14 (16 जन॰) तक, फिर विष्कम्भ 04:03 (17 जन॰) तक
- करण
- वणिज 07:50 तक, फिर विष्टि 21:06 तक, फिर बव 10:22 (16 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:43 – 14:07
- यमगंड08:33 – 09:56
- गुलिक काल11:20 – 12:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:09 – 08:33
- अमृत(शुभ)08:33 – 09:56
- काल(वर्जित (परंपरा))09:56 – 11:20
- शुभ(शुभ)11:20 – 12:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:43 – 14:07
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:31
- चर(सामान्य)15:31 – 16:54
- लाभ(शुभ)16:54 – 18:18
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:18 – 19:54
- शुभ(शुभ)19:54 – 21:31
- अमृत(शुभ)21:31 – 23:07
- चर(सामान्य)23:07 – 00:43 (16 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:43 (16 जन॰) – 02:20 (16 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:20 (16 जन॰) – 03:56 (16 जन॰)
- लाभ(शुभ)03:56 (16 जन॰) – 05:33 (16 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:33 (16 जन॰) – 07:09 (16 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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