पंचांग 9 सितंबर 2014

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

9 सितंबर 2014 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:42
चंद्रोदय18:55
चंद्रास्तनहीं
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1936 · विक्रम (चैत्रादि) 2071
संवत्सर:
जय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कुंभ 19:30 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 07:08 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 03:40 (10 सित॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 00:36 (11 सित॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 00:51 (10 सित॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 22:31 (10 सित॰) तक
योग
धृति 10:21 तक, फिर शूल 06:27 (10 सित॰) तक
करण
बव 07:08 तक, फिर बालव 17:22 तक, फिर कौलव 03:40 (10 सित॰) तक, फिर तैतिल 14:05 (10 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:56
  • राहु काल15:37 – 17:09
  • यमगंड09:26 – 10:59
  • गुलिक काल12:31 – 14:04

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:21 – 07:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:26
  • चर(सामान्य)09:26 – 10:59
  • लाभ(शुभ)10:59 – 12:31
  • अमृत(शुभ)12:31 – 14:04
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:04 – 15:37
  • शुभ(शुभ)15:37 – 17:09
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:09 – 18:42

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:42 – 20:09
  • लाभ(शुभ)20:09 – 21:37
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:37 – 23:04
  • शुभ(शुभ)23:04 – 00:31 (10 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:31 (10 सित॰) – 01:59 (10 सित॰)
  • चर(सामान्य)01:59 (10 सित॰) – 03:26 (10 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:26 (10 सित॰) – 04:54 (10 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (10 सित॰) – 06:21 (10 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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