पंचांग 3 मई 2016

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 मई 2016 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:06
सूर्यास्त18:56
चंद्रोदय03:59 (4 मई)
चंद्रास्त15:28
मास:
चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
संवत्सर:
दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
कुंभ 12:50 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 14:58 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 11:56 (4 मई) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 18:20 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 16:00 (4 मई) तक
योग
इन्द्र 08:54 तक, फिर वैधृति 05:26 (4 मई) तक, फिर विष्कम्भ 01:35 (5 मई) तक
करण
बालव 14:58 तक, फिर कौलव 01:30 (4 मई) तक, फिर तैतिल 11:56 (4 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57
  • राहु काल15:44 – 17:20
  • यमगंड09:18 – 10:55
  • गुलिक काल12:31 – 14:07

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:06 – 07:42
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:42 – 09:18
  • चर(सामान्य)09:18 – 10:55
  • लाभ(शुभ)10:55 – 12:31
  • अमृत(शुभ)12:31 – 14:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:44
  • शुभ(शुभ)15:44 – 17:20
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:20 – 18:56

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:56 – 20:20
  • लाभ(शुभ)20:20 – 21:44
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:44 – 23:07
  • शुभ(शुभ)23:07 – 00:31 (4 मई)
  • अमृत(शुभ)00:31 (4 मई) – 01:54 (4 मई)
  • चर(सामान्य)01:54 (4 मई) – 03:18 (4 मई)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:18 (4 मई) – 04:42 (4 मई)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:42 (4 मई) – 06:05 (4 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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