पंचांग 5 मई 2016

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 मई 2016 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:05
सूर्यास्त18:57
चंद्रोदय05:38 (6 मई)
चंद्रास्त17:32
मास:
चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
संवत्सर:
दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
मीन 13:18 तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 08:29 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 04:47 (6 मई) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 00:59 (7 मई) तक
नक्षत्र
रेवती 13:18 तक, फिर अश्विनी 10:22 (6 मई) तक
योग
प्रीति 21:29 तक, फिर आयुष्मान 17:16 (6 मई) तक
करण
वणिज 08:29 तक, फिर विष्टि 18:39 तक, फिर शकुनि 04:47 (6 मई) तक, फिर चतुष्पद 14:53 (6 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57
  • राहु काल14:07 – 15:44
  • यमगंड06:05 – 07:41
  • गुलिक काल09:18 – 10:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:05 – 07:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:41 – 09:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:18 – 10:54
  • चर(सामान्य)10:54 – 12:31
  • लाभ(शुभ)12:31 – 14:07
  • अमृत(शुभ)14:07 – 15:44
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:44 – 17:21
  • शुभ(शुभ)17:21 – 18:57

रात

  • अमृत(शुभ)18:57 – 20:20
  • चर(सामान्य)20:20 – 21:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:44 – 23:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:07 – 00:31 (6 मई)
  • लाभ(शुभ)00:31 (6 मई) – 01:54 (6 मई)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:54 (6 मई) – 03:17 (6 मई)
  • शुभ(शुभ)03:17 (6 मई) – 04:41 (6 मई)
  • अमृत(शुभ)04:41 (6 मई) – 06:04 (6 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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