पंचांग 16 अगस्त 2016

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 अगस्त 2016 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:00
चंद्रोदय17:22
चंद्रास्त05:01 (17 अग॰)
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
संवत्सर:
दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
धनु 06:39 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 17:26 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 16:27 (17 अग॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 00:42 (17 अग॰) तक, फिर श्रवण 00:17 (18 अग॰) तक
योग
आयुष्मान 00:18 (17 अग॰) तक, फिर सौभाग्य 22:20 (17 अग॰) तक
करण
तैतिल 17:26 तक, फिर गर 05:01 (17 अग॰) तक, फिर वणिज 16:27 (17 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04
  • राहु काल15:49 – 17:25
  • यमगंड09:27 – 11:03
  • गुलिक काल12:38 – 14:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:16 – 07:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:52 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 11:03
  • लाभ(शुभ)11:03 – 12:38
  • अमृत(शुभ)12:38 – 14:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:49
  • शुभ(शुभ)15:49 – 17:25
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:25 – 19:00

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:00 – 20:25
  • लाभ(शुभ)20:25 – 21:49
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:49 – 23:14
  • शुभ(शुभ)23:14 – 00:38 (17 अग॰)
  • अमृत(शुभ)00:38 (17 अग॰) – 02:03 (17 अग॰)
  • चर(सामान्य)02:03 (17 अग॰) – 03:27 (17 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (17 अग॰) – 04:52 (17 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:52 (17 अग॰) – 06:16 (17 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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