पंचांग 8 मार्च 2017
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
8 मार्च 2017 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:48
सूर्यास्त18:42
चंद्रोदय14:53
चंद्रास्त04:10 (9 मार्च)
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
- संवत्सर:
- दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- मिथुन 11:56 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल एकादशी 22:49 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 21:39 (9 मार्च) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 17:45 तक, फिर पुष्य 17:12 (9 मार्च) तक
- योग
- सौभाग्य 11:13 तक, फिर शोभन 08:59 (9 मार्च) तक
- करण
- वणिज 11:31 तक, फिर विष्टि 22:49 तक, फिर बव 10:12 (9 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:09परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:45 – 14:14
- यमगंड08:17 – 09:46
- गुलिक काल11:16 – 12:45
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:48 – 08:17
- अमृत(शुभ)08:17 – 09:46
- काल(वर्जित (परंपरा))09:46 – 11:16
- शुभ(शुभ)11:16 – 12:45
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:45 – 14:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:13
- लाभ(शुभ)17:13 – 18:42
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:42 – 20:13
- शुभ(शुभ)20:13 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:14
- चर(सामान्य)23:14 – 00:45 (9 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:45 (9 मार्च) – 02:15 (9 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:15 (9 मार्च) – 03:46 (9 मार्च)
- लाभ(शुभ)03:46 (9 मार्च) – 05:16 (9 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:16 (9 मार्च) – 06:47 (9 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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