पंचांग 16 दिसंबर 2017

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 दिसंबर 2017 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:00
चंद्रोदय05:59 (17 दिस॰)
चंद्रास्त16:46
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1939 · विक्रम (चैत्रादि) 2074
संवत्सर:
हेमलंबी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 07:10 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 09:29 (17 दिस॰) तक
नक्षत्र
अनुराधा 04:12 (17 दिस॰) तक, फिर ज्येष्ठा 07:06 (18 दिस॰) तक
योग
धृति 02:13 (17 दिस॰) तक, फिर शूल 02:59 (18 दिस॰) तक
करण
वणिज 07:10 तक, फिर विष्टि 20:18 तक, फिर शकुनि 09:29 (17 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:52
  • राहु काल09:44 – 11:07
  • यमगंड13:52 – 15:15
  • गुलिक काल06:59 – 08:22

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:59 – 08:22
  • शुभ(शुभ)08:22 – 09:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:44 – 11:07
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:07 – 12:30
  • चर(सामान्य)12:30 – 13:52
  • लाभ(शुभ)13:52 – 15:15
  • अमृत(शुभ)15:15 – 16:38
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:38 – 18:00

रात

  • लाभ(शुभ)18:00 – 19:38
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:38 – 21:15
  • शुभ(शुभ)21:15 – 22:53
  • अमृत(शुभ)22:53 – 00:30 (17 दिस॰)
  • चर(सामान्य)00:30 (17 दिस॰) – 02:07 (17 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:07 (17 दिस॰) – 03:45 (17 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:45 (17 दिस॰) – 05:22 (17 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)05:22 (17 दिस॰) – 06:59 (17 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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