पंचांग 18 दिसंबर 2017

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 दिसंबर 2017 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:00
सूर्यास्त18:01
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:15
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1939 · विक्रम (चैत्रादि) 2074
संवत्सर:
हेमलंबी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृश्चिक 07:06 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 12:00 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 14:39 (19 दिस॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 07:06 तक, फिर मूल 10:09 (19 दिस॰) तक
योग
गण्ड 03:52 (19 दिस॰) तक, फिर वृद्धि 04:49 (20 दिस॰) तक
करण
नाग 12:00 तक, फिर किंस्तुघ्न 01:19 (19 दिस॰) तक, फिर बव 14:39 (19 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:53
  • राहु काल08:23 – 09:45
  • यमगंड11:08 – 12:31
  • गुलिक काल13:53 – 15:16

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)07:00 – 08:23
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:23 – 09:45
  • शुभ(शुभ)09:45 – 11:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:08 – 12:31
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 13:53
  • चर(सामान्य)13:53 – 15:16
  • लाभ(शुभ)15:16 – 16:39
  • अमृत(शुभ)16:39 – 18:01

रात

  • चर(सामान्य)18:01 – 19:39
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:39 – 21:16
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:16 – 22:54
  • लाभ(शुभ)22:54 – 00:31 (19 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:31 (19 दिस॰) – 02:08 (19 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)02:08 (19 दिस॰) – 03:46 (19 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)03:46 (19 दिस॰) – 05:23 (19 दिस॰)
  • चर(सामान्य)05:23 (19 दिस॰) – 07:01 (19 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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