पंचांग 25 जुलाई 2018

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 जुलाई 2018 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:09
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय17:21
चंद्रास्त04:44 (26 जुल॰)
मास:
आषाढ़ (अमांत)
संवत:
शक 1940 · विक्रम (चैत्रादि) 2075
संवत्सर:
विलंबी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 20:45 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 23:16 (26 जुल॰) तक
नक्षत्र
मूल 18:21 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 21:25 (26 जुल॰) तक
योग
इन्द्र 08:49 तक, फिर वैधृति 09:49 (26 जुल॰) तक
करण
कौलव 07:34 तक, फिर तैतिल 20:45 तक, फिर गर 10:00 (26 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:41 – 14:18
  • यमगंड07:47 – 09:25
  • गुलिक काल11:03 – 12:41

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:09 – 07:47
  • अमृत(शुभ)07:47 – 09:25
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 11:03
  • शुभ(शुभ)11:03 – 12:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:56
  • चर(सामान्य)15:56 – 17:34
  • लाभ(शुभ)17:34 – 19:12

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:12 – 20:34
  • शुभ(शुभ)20:34 – 21:56
  • अमृत(शुभ)21:56 – 23:18
  • चर(सामान्य)23:18 – 00:41 (26 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:41 (26 जुल॰) – 02:03 (26 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (26 जुल॰) – 03:25 (26 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)03:25 (26 जुल॰) – 04:47 (26 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:47 (26 जुल॰) – 06:10 (26 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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