पंचांग 30 जुलाई 2019

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 जुलाई 2019 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:11
सूर्यास्त19:10
चंद्रोदय05:04 (31 जुल॰)
चंद्रास्त17:37
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1941 · विक्रम (चैत्रादि) 2076
संवत्सर:
विकारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 14:49 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 11:57 (31 जुल॰) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 16:47 तक, फिर पुनर्वसु 14:40 (31 जुल॰) तक
योग
हर्षण 22:38 तक, फिर वज्र 19:05 (31 जुल॰) तक
करण
वणिज 14:49 तक, फिर विष्टि 01:27 (31 जुल॰) तक, फिर शकुनि 11:57 (31 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
  • राहु काल15:55 – 17:33
  • यमगंड09:26 – 11:03
  • गुलिक काल12:40 – 14:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:11 – 07:48
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:48 – 09:26
  • चर(सामान्य)09:26 – 11:03
  • लाभ(शुभ)11:03 – 12:40
  • अमृत(शुभ)12:40 – 14:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:55
  • शुभ(शुभ)15:55 – 17:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:33 – 19:10

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:10 – 20:33
  • लाभ(शुभ)20:33 – 21:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:55 – 23:18
  • शुभ(शुभ)23:18 – 00:41 (31 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)00:41 (31 जुल॰) – 02:03 (31 जुल॰)
  • चर(सामान्य)02:03 (31 जुल॰) – 03:26 (31 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:26 (31 जुल॰) – 04:49 (31 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:49 (31 जुल॰) – 06:11 (31 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें