पंचांग 19 सितंबर 2020
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 सितंबर 2020 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:33
चंद्रोदय08:06
चंद्रास्त20:17
- मास:
- अधिक आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1942 · विक्रम (चैत्रादि) 2077
- संवत्सर:
- शार्वरी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कन्या 14:42 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 09:10 तक, फिर शुक्ल तृतीया 05:39 (20 सित॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 02:27 (21 सित॰) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 01:20 (20 सित॰) तक, फिर स्वाती 22:51 (20 सित॰) तक
- योग
- ब्रह्म 15:34 तक, फिर इन्द्र 11:37 (20 सित॰) तक
- करण
- कौलव 09:10 तक, फिर तैतिल 19:23 तक, फिर गर 05:39 (20 सित॰) तक, फिर वणिज 16:00 (20 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:52
- राहु काल09:25 – 10:56
- यमगंड13:59 – 15:30
- गुलिक काल06:22 – 07:54
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:54
- शुभ(शुभ)07:54 – 09:25
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:56
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:56 – 12:28
- चर(सामान्य)12:28 – 13:59
- लाभ(शुभ)13:59 – 15:30
- अमृत(शुभ)15:30 – 17:01
- काल(वर्जित (परंपरा))17:01 – 18:33
रात
- लाभ(शुभ)18:33 – 20:01
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:01 – 21:30
- शुभ(शुभ)21:30 – 22:59
- अमृत(शुभ)22:59 – 00:28 (20 सित॰)
- चर(सामान्य)00:28 (20 सित॰) – 01:56 (20 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:56 (20 सित॰) – 03:25 (20 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:25 (20 सित॰) – 04:54 (20 सित॰)
- लाभ(शुभ)04:54 (20 सित॰) – 06:23 (20 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें