पंचांग 16 अक्टूबर 2020

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 अक्टूबर 2020 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:28
सूर्यास्त18:11
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:05
मास:
अधिक आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1942 · विक्रम (चैत्रादि) 2077
संवत्सर:
शार्वरी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कन्या 01:24 (17 अक्टू॰) तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 01:01 (17 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 21:09 (17 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
हस्त 14:57 तक, फिर चित्रा 11:51 (17 अक्टू॰) तक
योग
वैधृति 01:45 (17 अक्टू॰) तक, फिर विष्कम्भ 21:24 (17 अक्टू॰) तक
करण
चतुष्पद 14:57 तक, फिर नाग 01:01 (17 अक्टू॰) तक, फिर किंस्तुघ्न 11:04 (17 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:43
  • राहु काल10:52 – 12:19
  • यमगंड15:15 – 16:43
  • गुलिक काल07:56 – 09:24

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:28 – 07:56
  • लाभ(शुभ)07:56 – 09:24
  • अमृत(शुभ)09:24 – 10:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:19
  • शुभ(शुभ)12:19 – 13:47
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:47 – 15:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:15 – 16:43
  • चर(सामान्य)16:43 – 18:11

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:11 – 19:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:43 – 21:15
  • लाभ(शुभ)21:15 – 22:47
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:47 – 00:20 (17 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)00:20 (17 अक्टू॰) – 01:52 (17 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)01:52 (17 अक्टू॰) – 03:24 (17 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)03:24 (17 अक्टू॰) – 04:56 (17 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:56 (17 अक्टू॰) – 06:28 (17 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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