पंचांग 31 अगस्त 2021

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 अगस्त 2021 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय00:56 (1 सित॰)
चंद्रास्त13:43
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1943 · विक्रम (चैत्रादि) 2078
संवत्सर:
प्लव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृषभ 23:11 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण नवमी 04:23 (1 सित॰) तक, फिर कृष्ण दशमी 06:22 (2 सित॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 09:43 तक, फिर मृगशीर्ष 12:34 (1 सित॰) तक
योग
हर्षण 08:47 तक, फिर वज्र 09:38 (1 सित॰) तक
करण
तैतिल 15:14 तक, फिर गर 04:23 (1 सित॰) तक, फिर वणिज 17:27 (1 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
  • राहु काल15:42 – 17:15
  • यमगंड09:27 – 11:00
  • गुलिक काल12:34 – 14:08

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:19 – 07:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 11:00
  • लाभ(शुभ)11:00 – 12:34
  • अमृत(शुभ)12:34 – 14:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:42
  • शुभ(शुभ)15:42 – 17:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:49

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:49 – 20:15
  • लाभ(शुभ)20:15 – 21:42
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:08
  • शुभ(शुभ)23:08 – 00:34 (1 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:34 (1 सित॰) – 02:01 (1 सित॰)
  • चर(सामान्य)02:01 (1 सित॰) – 03:27 (1 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (1 सित॰) – 04:53 (1 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:53 (1 सित॰) – 06:19 (1 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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