पंचांग 3 अक्टूबर 2021

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 अक्टूबर 2021 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय04:11 (4 अक्टू॰)
चंद्रास्त16:27
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1943 · विक्रम (चैत्रादि) 2078
संवत्सर:
प्लव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 22:30 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 21:05 (4 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
मघा 03:26 (4 अक्टू॰) तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 02:35 (5 अक्टू॰) तक
योग
साध्य 16:16 तक, फिर शुभ 14:11 (4 अक्टू॰) तक
करण
कौलव 10:56 तक, फिर तैतिल 22:30 तक, फिर गर 09:53 (4 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:47
  • राहु काल16:51 – 18:21
  • यमगंड12:23 – 13:52
  • गुलिक काल15:22 – 16:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:24
  • लाभ(शुभ)09:24 – 10:53
  • अमृत(शुभ)10:53 – 12:23
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:23 – 13:52
  • शुभ(शुभ)13:52 – 15:22
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:22 – 16:51
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:51 – 18:21

रात

  • शुभ(शुभ)18:21 – 19:51
  • अमृत(शुभ)19:51 – 21:22
  • चर(सामान्य)21:22 – 22:53
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:53 – 00:23 (4 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:23 (4 अक्टू॰) – 01:54 (4 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)01:54 (4 अक्टू॰) – 03:24 (4 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (4 अक्टू॰) – 04:55 (4 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)04:55 (4 अक्टू॰) – 06:25 (4 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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