पंचांग 6 अक्टूबर 2021

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

6 अक्टूबर 2021 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:18
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:28
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1943 · विक्रम (चैत्रादि) 2078
संवत्सर:
प्लव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 16:35 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 13:47 (7 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
हस्त 23:19 तक, फिर चित्रा 21:12 (7 अक्टू॰) तक
योग
ब्रह्म 08:31 तक, फिर इन्द्र 05:11 (7 अक्टू॰) तक, फिर वैधृति 01:39 (8 अक्टू॰) तक
करण
नाग 16:35 तक, फिर किंस्तुघ्न 03:12 (7 अक्टू॰) तक, फिर बव 13:47 (7 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:46परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:22 – 13:51
  • यमगंड07:55 – 09:24
  • गुलिक काल10:53 – 12:22

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:26 – 07:55
  • अमृत(शुभ)07:55 – 09:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
  • शुभ(शुभ)10:53 – 12:22
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:22 – 13:51
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:51 – 15:20
  • चर(सामान्य)15:20 – 16:49
  • लाभ(शुभ)16:49 – 18:18

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:18 – 19:49
  • शुभ(शुभ)19:49 – 21:20
  • अमृत(शुभ)21:20 – 22:51
  • चर(सामान्य)22:51 – 00:22 (7 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:22 (7 अक्टू॰) – 01:53 (7 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (7 अक्टू॰) – 03:24 (7 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)03:24 (7 अक्टू॰) – 04:55 (7 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:55 (7 अक्टू॰) – 06:26 (7 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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