पंचांग 30 नवंबर 2021

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 नवंबर 2021 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:49
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय03:27 (1 दिस॰)
चंद्रास्त14:51
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1943 · विक्रम (चैत्रादि) 2078
संवत्सर:
प्लव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 02:14 (1 दिस॰) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 23:36 (1 दिस॰) तक
नक्षत्र
हस्त 20:34 तक, फिर चित्रा 18:47 (1 दिस॰) तक
योग
आयुष्मान 00:02 (1 दिस॰) तक, फिर सौभाग्य 20:43 (1 दिस॰) तक
करण
बव 15:19 तक, फिर बालव 02:14 (1 दिस॰) तक, फिर कौलव 12:59 (1 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:45
  • राहु काल15:09 – 16:33
  • यमगंड09:36 – 10:59
  • गुलिक काल12:23 – 13:46

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:49 – 08:13
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:13 – 09:36
  • चर(सामान्य)09:36 – 10:59
  • लाभ(शुभ)10:59 – 12:23
  • अमृत(शुभ)12:23 – 13:46
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:46 – 15:09
  • शुभ(शुभ)15:09 – 16:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:33 – 17:56

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:33
  • लाभ(शुभ)19:33 – 21:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:09 – 22:46
  • शुभ(शुभ)22:46 – 00:23 (1 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)00:23 (1 दिस॰) – 02:00 (1 दिस॰)
  • चर(सामान्य)02:00 (1 दिस॰) – 03:36 (1 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:36 (1 दिस॰) – 05:13 (1 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:13 (1 दिस॰) – 06:50 (1 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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