पंचांग 27 फ़रवरी 2022

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 फ़रवरी 2022 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:55
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदय05:04 (28 फ़र॰)
चंद्रास्त15:18
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1943 · विक्रम (चैत्रादि) 2078
संवत्सर:
प्लव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
धनु 14:22 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 08:13 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 05:43 (28 फ़र॰) तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 03:16 (1 मार्च) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 08:48 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 07:01 (28 फ़र॰) तक
योग
व्यतीपात 17:38 तक, फिर वरीयान 14:24 (28 फ़र॰) तक
करण
बालव 08:13 तक, फिर कौलव 18:58 तक, फिर तैतिल 05:43 (28 फ़र॰) तक, फिर गर 16:29 (28 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:10
  • राहु काल17:11 – 18:39
  • यमगंड12:47 – 14:15
  • गुलिक काल15:43 – 17:11

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:55 – 08:23
  • चर(सामान्य)08:23 – 09:51
  • लाभ(शुभ)09:51 – 11:19
  • अमृत(शुभ)11:19 – 12:47
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:47 – 14:15
  • शुभ(शुभ)14:15 – 15:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:11 – 18:39

रात

  • शुभ(शुभ)18:39 – 20:11
  • अमृत(शुभ)20:11 – 21:43
  • चर(सामान्य)21:43 – 23:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:47 (28 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:47 (28 फ़र॰) – 02:18 (28 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)02:18 (28 फ़र॰) – 03:50 (28 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:50 (28 फ़र॰) – 05:22 (28 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)05:22 (28 फ़र॰) – 06:54 (28 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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