पंचांग 1 अक्टूबर 2022

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 अक्टूबर 2022 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:23
चंद्रोदय11:25
चंद्रास्त22:36
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
संवत्सर:
शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
वृश्चिक 03:11 (2 अक्टू॰) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 20:47 तक, फिर शुक्ल सप्तमी 18:47 (2 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 03:11 (2 अक्टू॰) तक, फिर मूल 01:52 (3 अक्टू॰) तक
योग
आयुष्मान 19:57 तक, फिर सौभाग्य 17:13 (2 अक्टू॰) तक
करण
कौलव 09:42 तक, फिर तैतिल 20:47 तक, फिर गर 07:48 (2 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
  • राहु काल09:24 – 10:54
  • यमगंड13:53 – 15:23
  • गुलिक काल06:25 – 07:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:54
  • शुभ(शुभ)07:54 – 09:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:54 – 12:24
  • चर(सामान्य)12:24 – 13:53
  • लाभ(शुभ)13:53 – 15:23
  • अमृत(शुभ)15:23 – 16:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:53 – 18:23

रात

  • लाभ(शुभ)18:23 – 19:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:53 – 21:23
  • शुभ(शुभ)21:23 – 22:54
  • अमृत(शुभ)22:54 – 00:24 (2 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)00:24 (2 अक्टू॰) – 01:54 (2 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:54 (2 अक्टू॰) – 03:24 (2 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (2 अक्टू॰) – 04:54 (2 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)04:54 (2 अक्टू॰) – 06:25 (2 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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