पंचांग 12 अक्टूबर 2022
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
12 अक्टूबर 2022 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:14
चंद्रोदय20:02
चंद्रास्त08:29
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
- संवत्सर:
- शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मेष 23:29 तक, फिर वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 02:00 (13 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 03:08 (14 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- भरणी 17:09 तक, फिर कृत्तिका 18:40 (13 अक्टू॰) तक
- योग
- वज्र 14:19 तक, फिर सिद्धि 13:53 (13 अक्टू॰) तक
- करण
- वणिज 13:39 तक, फिर विष्टि 02:00 (13 अक्टू॰) तक, फिर बव 14:29 (13 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:20 – 13:49
- यमगंड07:55 – 09:24
- गुलिक काल10:52 – 12:20
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:27 – 07:55
- अमृत(शुभ)07:55 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:52
- शुभ(शुभ)10:52 – 12:20
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:20 – 13:49
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:49 – 15:17
- चर(सामान्य)15:17 – 16:46
- लाभ(शुभ)16:46 – 18:14
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:14 – 19:46
- शुभ(शुभ)19:46 – 21:17
- अमृत(शुभ)21:17 – 22:49
- चर(सामान्य)22:49 – 00:21 (13 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:21 (13 अक्टू॰) – 01:52 (13 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:52 (13 अक्टू॰) – 03:24 (13 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:24 (13 अक्टू॰) – 04:56 (13 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:56 (13 अक्टू॰) – 06:27 (13 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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