पंचांग 17 जनवरी 2023
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 जनवरी 2023 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:19
चंद्रोदय03:19 (18 जन॰)
चंद्रास्त13:47
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
- संवत्सर:
- शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- तुला 13:00 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 18:05 तक, फिर कृष्ण एकादशी 16:03 (18 जन॰) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 18:46 तक, फिर अनुराधा 17:22 (18 जन॰) तक
- योग
- शूल 08:34 तक, फिर गण्ड 05:58 (18 जन॰) तक, फिर वृद्धि 02:46 (19 जन॰) तक
- करण
- विष्टि 18:05 तक, फिर बव 05:10 (18 जन॰) तक, फिर बालव 16:03 (18 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:06
- राहु काल15:31 – 16:55
- यमगंड09:57 – 11:20
- गुलिक काल12:44 – 14:08
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:57
- चर(सामान्य)09:57 – 11:20
- लाभ(शुभ)11:20 – 12:44
- अमृत(शुभ)12:44 – 14:08
- काल(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:31
- शुभ(शुभ)15:31 – 16:55
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:55 – 18:19
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:19 – 19:55
- लाभ(शुभ)19:55 – 21:31
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:31 – 23:08
- शुभ(शुभ)23:08 – 00:44 (18 जन॰)
- अमृत(शुभ)00:44 (18 जन॰) – 02:20 (18 जन॰)
- चर(सामान्य)02:20 (18 जन॰) – 03:57 (18 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:57 (18 जन॰) – 05:33 (18 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:33 (18 जन॰) – 07:09 (18 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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