पंचांग 22 फ़रवरी 2023
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 फ़रवरी 2023 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:58
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय08:32
चंद्रास्त20:51
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
- संवत्सर:
- शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 03:25 (23 फ़र॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 01:34 (24 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 04:49 (23 फ़र॰) तक, फिर रेवती 03:44 (24 फ़र॰) तक
- योग
- साध्य 23:46 तक, फिर शुभ 20:57 (23 फ़र॰) तक
- करण
- तैतिल 16:36 तक, फिर गर 03:25 (23 फ़र॰) तक, फिर वणिज 14:23 (23 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:48 – 14:15
- यमगंड08:25 – 09:53
- गुलिक काल11:20 – 12:48
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:58 – 08:25
- अमृत(शुभ)08:25 – 09:53
- काल(वर्जित (परंपरा))09:53 – 11:20
- शुभ(शुभ)11:20 – 12:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:42
- चर(सामान्य)15:42 – 17:10
- लाभ(शुभ)17:10 – 18:37
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:37 – 20:10
- शुभ(शुभ)20:10 – 21:42
- अमृत(शुभ)21:42 – 23:15
- चर(सामान्य)23:15 – 00:47 (23 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:47 (23 फ़र॰) – 02:20 (23 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:20 (23 फ़र॰) – 03:52 (23 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)03:52 (23 फ़र॰) – 05:25 (23 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:25 (23 फ़र॰) – 06:57 (23 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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