पंचांग 21 अक्टूबर 2023
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 अक्टूबर 2023 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय12:32
चंद्रास्त23:38
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1945 · विक्रम (चैत्रादि) 2080
- संवत्सर:
- शोभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- धनु 01:38 (22 अक्टू॰) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल सप्तमी 21:53 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 19:59 (22 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 19:53 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 18:44 (22 अक्टू॰) तक
- योग
- सुकर्मा 00:36 (22 अक्टू॰) तक, फिर धृति 21:52 (22 अक्टू॰) तक
- करण
- गर 10:42 तक, फिर वणिज 21:53 तक, फिर विष्टि 08:59 (22 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
- राहु काल09:24 – 10:51
- यमगंड13:46 – 15:13
- गुलिक काल06:30 – 07:57
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:30 – 07:57
- शुभ(शुभ)07:57 – 09:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:51
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:19
- चर(सामान्य)12:19 – 13:46
- लाभ(शुभ)13:46 – 15:13
- अमृत(शुभ)15:13 – 16:40
- काल(वर्जित (परंपरा))16:40 – 18:08
रात
- लाभ(शुभ)18:08 – 19:41
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:41 – 21:13
- शुभ(शुभ)21:13 – 22:46
- अमृत(शुभ)22:46 – 00:19 (22 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)00:19 (22 अक्टू॰) – 01:52 (22 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:52 (22 अक्टू॰) – 03:24 (22 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (22 अक्टू॰) – 04:57 (22 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)04:57 (22 अक्टू॰) – 06:30 (22 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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