पंचांग 1 नवंबर 2023

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 नवंबर 2023 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:34
सूर्यास्त18:01
चंद्रोदय20:56
चंद्रास्त09:51
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1945 · विक्रम (चैत्रादि) 2080
संवत्सर:
शोभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
वृषभ 16:11 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 21:19 तक, फिर कृष्ण पंचमी 21:52 (2 नव॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 04:36 (2 नव॰) तक, फिर आर्द्रा 05:57 (3 नव॰) तक
योग
परिघ 14:06 तक, फिर शिव 13:12 (2 नव॰) तक
करण
बव 09:19 तक, फिर बालव 21:19 तक, फिर कौलव 09:30 (2 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:40परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:18 – 13:44
  • यमगंड08:00 – 09:26
  • गुलिक काल10:52 – 12:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:34 – 08:00
  • अमृत(शुभ)08:00 – 09:26
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:52
  • शुभ(शुभ)10:52 – 12:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:44
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:44 – 15:10
  • चर(सामान्य)15:10 – 16:35
  • लाभ(शुभ)16:35 – 18:01

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:01 – 19:36
  • शुभ(शुभ)19:36 – 21:10
  • अमृत(शुभ)21:10 – 22:44
  • चर(सामान्य)22:44 – 00:18 (2 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:18 (2 नव॰) – 01:52 (2 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:52 (2 नव॰) – 03:26 (2 नव॰)
  • लाभ(शुभ)03:26 (2 नव॰) – 05:00 (2 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:00 (2 नव॰) – 06:34 (2 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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