पंचांग 31 जनवरी 2024

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 जनवरी 2024 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:08
सूर्यास्त18:27
चंद्रोदय23:02
चंद्रास्त10:28
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1945 · विक्रम (चैत्रादि) 2080
संवत्सर:
शोभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 11:36 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 14:04 (1 फ़र॰) तक
नक्षत्र
हस्त 01:07 (1 फ़र॰) तक, फिर चित्रा 03:49 (2 फ़र॰) तक
योग
सुकर्मा 11:40 तक, फिर धृति 12:27 (1 फ़र॰) तक
करण
तैतिल 11:36 तक, फिर गर 00:53 (1 फ़र॰) तक, फिर वणिज 14:04 (1 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:10परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:47 – 14:12
  • यमगंड08:33 – 09:58
  • गुलिक काल11:23 – 12:47

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:08 – 08:33
  • अमृत(शुभ)08:33 – 09:58
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:58 – 11:23
  • शुभ(शुभ)11:23 – 12:47
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:47 – 14:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:37
  • चर(सामान्य)15:37 – 17:02
  • लाभ(शुभ)17:02 – 18:27

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:27 – 20:02
  • शुभ(शुभ)20:02 – 21:37
  • अमृत(शुभ)21:37 – 23:12
  • चर(सामान्य)23:12 – 00:47 (1 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:47 (1 फ़र॰) – 02:22 (1 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:22 (1 फ़र॰) – 03:58 (1 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)03:58 (1 फ़र॰) – 05:33 (1 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:33 (1 फ़र॰) – 07:08 (1 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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