पंचांग 3 अप्रैल 2024
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 अप्रैल 2024 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय03:01 (4 अप्रैल)
चंद्रास्त13:19
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1945 · विक्रम (चैत्रादि) 2080
- संवत्सर:
- शोभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 18:29 तक, फिर कृष्ण दशमी 16:14 (4 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा 21:47 तक, फिर श्रवण 20:11 (4 अप्रैल) तक
- योग
- शिव 16:09 तक, फिर सिद्ध 13:15 (4 अप्रैल) तक
- करण
- तैतिल 07:24 तक, फिर गर 18:29 तक, फिर वणिज 05:26 (4 अप्रैल) तक, फिर विष्टि 16:14 (4 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:02परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:37 – 14:10
- यमगंड07:59 – 09:32
- गुलिक काल11:05 – 12:37
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:26 – 07:59
- अमृत(शुभ)07:59 – 09:32
- काल(वर्जित (परंपरा))09:32 – 11:05
- शुभ(शुभ)11:05 – 12:37
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:10
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:16
- लाभ(शुभ)17:16 – 18:48
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:48 – 20:15
- शुभ(शुभ)20:15 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:10
- चर(सामान्य)23:10 – 00:37 (4 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (4 अप्रैल) – 02:04 (4 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:04 (4 अप्रैल) – 03:31 (4 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)03:31 (4 अप्रैल) – 04:58 (4 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:58 (4 अप्रैल) – 06:26 (4 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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