पंचांग 17 जुलाई 2024

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 जुलाई 2024 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:07
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय15:35
चंद्रास्त02:44 (18 जुल॰)
मास:
आषाढ़ (अमांत)
संवत:
शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
संवत्सर:
क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 21:03 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 20:44 (18 जुल॰) तक
नक्षत्र
अनुराधा 03:12 (18 जुल॰) तक, फिर ज्येष्ठा 03:25 (19 जुल॰) तक
योग
शुभ 07:03 तक, फिर शुक्ल 06:12 (18 जुल॰) तक
करण
वणिज 08:54 तक, फिर विष्टि 21:03 तक, फिर बव 08:59 (18 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:40 – 14:19
  • यमगंड07:45 – 09:23
  • गुलिक काल11:02 – 12:40

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:07 – 07:45
  • अमृत(शुभ)07:45 – 09:23
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:23 – 11:02
  • शुभ(शुभ)11:02 – 12:40
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:19
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:19 – 15:57
  • चर(सामान्य)15:57 – 17:35
  • लाभ(शुभ)17:35 – 19:14

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:35
  • शुभ(शुभ)20:35 – 21:57
  • अमृत(शुभ)21:57 – 23:19
  • चर(सामान्य)23:19 – 00:40 (18 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (18 जुल॰) – 02:02 (18 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:02 (18 जुल॰) – 03:24 (18 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)03:24 (18 जुल॰) – 04:45 (18 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:45 (18 जुल॰) – 06:07 (18 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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