पंचांग 21 सितंबर 2024

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 सितंबर 2024 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:31
चंद्रोदय21:02
चंद्रास्त09:30
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
संवत्सर:
क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मेष 06:09 (22 सित॰) तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 18:14 तक, फिर कृष्ण पंचमी 15:43 (22 सित॰) तक
नक्षत्र
भरणी 00:36 (22 सित॰) तक, फिर कृत्तिका 23:02 (22 सित॰) तक
योग
व्याघात 11:36 तक, फिर हर्षण 08:17 (22 सित॰) तक
करण
बव 07:41 तक, फिर बालव 18:14 तक, फिर कौलव 04:54 (22 सित॰) तक, फिर तैतिल 15:43 (22 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:51
  • राहु काल09:25 – 10:56
  • यमगंड13:58 – 15:29
  • गुलिक काल06:23 – 07:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
  • शुभ(शुभ)07:54 – 09:25
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:56 – 12:27
  • चर(सामान्य)12:27 – 13:58
  • लाभ(शुभ)13:58 – 15:29
  • अमृत(शुभ)15:29 – 17:00
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:00 – 18:31

रात

  • लाभ(शुभ)18:31 – 20:00
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:00 – 21:29
  • शुभ(शुभ)21:29 – 22:58
  • अमृत(शुभ)22:58 – 00:27 (22 सित॰)
  • चर(सामान्य)00:27 (22 सित॰) – 01:56 (22 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:56 (22 सित॰) – 03:25 (22 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:25 (22 सित॰) – 04:54 (22 सित॰)
  • लाभ(शुभ)04:54 (22 सित॰) – 06:23 (22 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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