पंचांग 10 दिसंबर 2024

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 दिसंबर 2024 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:56
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय13:49
चंद्रास्त02:31 (11 दिस॰)
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
संवत्सर:
क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल दशमी 03:43 (11 दिस॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 01:09 (12 दिस॰) तक
नक्षत्र
उत्तरभाद्रपदा 13:30 तक, फिर रेवती 11:48 (11 दिस॰) तक
योग
व्यतीपात 22:02 तक, फिर वरीयान 18:47 (11 दिस॰) तक
करण
तैतिल 16:54 तक, फिर गर 03:43 (11 दिस॰) तक, फिर वणिज 14:28 (11 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:49
  • राहु काल15:13 – 16:35
  • यमगंड09:41 – 11:04
  • गुलिक काल12:27 – 13:50

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:56 – 08:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:18 – 09:41
  • चर(सामान्य)09:41 – 11:04
  • लाभ(शुभ)11:04 – 12:27
  • अमृत(शुभ)12:27 – 13:50
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:50 – 15:13
  • शुभ(शुभ)15:13 – 16:35
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:35 – 17:58

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))17:58 – 19:35
  • लाभ(शुभ)19:35 – 21:13
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:13 – 22:50
  • शुभ(शुभ)22:50 – 00:27 (11 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)00:27 (11 दिस॰) – 02:04 (11 दिस॰)
  • चर(सामान्य)02:04 (11 दिस॰) – 03:42 (11 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:42 (11 दिस॰) – 05:19 (11 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:19 (11 दिस॰) – 06:56 (11 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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