पंचांग 25 दिसंबर 2024
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
25 दिसंबर 2024 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:04
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय02:51 (26 दिस॰)
चंद्रास्त13:46
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
- संवत्सर:
- क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 22:29 तक, फिर कृष्ण एकादशी 00:44 (27 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 15:22 तक, फिर स्वाती 18:09 (26 दिस॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 21:46 तक, फिर सुकर्मा 22:23 (26 दिस॰) तक
- करण
- वणिज 09:13 तक, फिर विष्टि 22:29 तक, फिर बव 11:40 (26 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 12:56परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:34 – 13:57
- यमगंड08:26 – 09:49
- गुलिक काल11:12 – 12:34
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:04 – 08:26
- अमृत(शुभ)08:26 – 09:49
- काल(वर्जित (परंपरा))09:49 – 11:12
- शुभ(शुभ)11:12 – 12:34
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:34 – 13:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:57 – 15:20
- चर(सामान्य)15:20 – 16:42
- लाभ(शुभ)16:42 – 18:05
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:05 – 19:42
- शुभ(शुभ)19:42 – 21:20
- अमृत(शुभ)21:20 – 22:57
- चर(सामान्य)22:57 – 00:34 (26 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:34 (26 दिस॰) – 02:12 (26 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:12 (26 दिस॰) – 03:49 (26 दिस॰)
- लाभ(शुभ)03:49 (26 दिस॰) – 05:27 (26 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:27 (26 दिस॰) – 07:04 (26 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें