पंचांग 16 अगस्त 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
16 अगस्त 2025 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:00
चंद्रोदय00:10 (17 अग॰)
चंद्रास्त12:52
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- मेष 11:43 तक, फिर वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी 21:35 तक, फिर कृष्ण नवमी 19:24 (17 अग॰) तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका 04:38 (17 अग॰) तक, फिर रोहिणी 03:17 (18 अग॰) तक
- योग
- वृद्धि 07:21 तक, फिर ध्रुव 04:28 (17 अग॰) तक, फिर व्याघात 01:40 (18 अग॰) तक
- करण
- बालव 10:42 तक, फिर कौलव 21:35 तक, फिर तैतिल 08:29 (17 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04
- राहु काल09:27 – 11:03
- यमगंड14:14 – 15:49
- गुलिक काल06:16 – 07:52
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:16 – 07:52
- शुभ(शुभ)07:52 – 09:27
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:38
- चर(सामान्य)12:38 – 14:14
- लाभ(शुभ)14:14 – 15:49
- अमृत(शुभ)15:49 – 17:25
- काल(वर्जित (परंपरा))17:25 – 19:00
रात
- लाभ(शुभ)19:00 – 20:25
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:25 – 21:49
- शुभ(शुभ)21:49 – 23:14
- अमृत(शुभ)23:14 – 00:38 (17 अग॰)
- चर(सामान्य)00:38 (17 अग॰) – 02:03 (17 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:03 (17 अग॰) – 03:27 (17 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (17 अग॰) – 04:52 (17 अग॰)
- लाभ(शुभ)04:52 (17 अग॰) – 06:16 (17 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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