पंचांग 22 अक्टूबर 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 अक्टूबर 2025 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय07:00
चंद्रास्त18:30
- मास:
- कार्तिक (अमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 20:17 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 22:47 (23 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- स्वाती 01:51 (23 अक्टू॰) तक, फिर विशाखा 04:51 (24 अक्टू॰) तक
- योग
- प्रीति 04:05 (23 अक्टू॰) तक, फिर आयुष्मान 04:59 (24 अक्टू॰) तक
- करण
- किंस्तुघ्न 07:04 तक, फिर बव 20:17 तक, फिर बालव 09:31 (23 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:18 – 13:46
- यमगंड07:57 – 09:24
- गुलिक काल10:51 – 12:18
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:30 – 07:57
- अमृत(शुभ)07:57 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:51
- शुभ(शुभ)10:51 – 12:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:46
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:46 – 15:13
- चर(सामान्य)15:13 – 16:40
- लाभ(शुभ)16:40 – 18:07
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:07 – 19:40
- शुभ(शुभ)19:40 – 21:13
- अमृत(शुभ)21:13 – 22:46
- चर(सामान्य)22:46 – 00:19 (23 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:19 (23 अक्टू॰) – 01:52 (23 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:52 (23 अक्टू॰) – 03:24 (23 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:24 (23 अक्टू॰) – 04:57 (23 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:57 (23 अक्टू॰) – 06:30 (23 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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