पंचांग 11 मार्च 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 मार्च 2026 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:46
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय01:40 (12 मार्च)
चंद्रास्त11:48
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
वृश्चिक 22:00 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 04:19 (12 मार्च) तक, फिर कृष्ण नवमी 06:29 (13 मार्च) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 22:00 तक, फिर मूल 00:43 (13 मार्च) तक
योग
वज्र 09:12 तक, फिर सिद्धि 09:58 (12 मार्च) तक
करण
बालव 15:08 तक, फिर कौलव 04:19 (12 मार्च) तक, फिर तैतिल 17:27 (12 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:08परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:44 – 14:14
  • यमगंड08:15 – 09:45
  • गुलिक काल11:15 – 12:44

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:46 – 08:15
  • अमृत(शुभ)08:15 – 09:45
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:45 – 11:15
  • शुभ(शुभ)11:15 – 12:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:44 – 14:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:13
  • लाभ(शुभ)17:13 – 18:43

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:43 – 20:13
  • शुभ(शुभ)20:13 – 21:43
  • अमृत(शुभ)21:43 – 23:14
  • चर(सामान्य)23:14 – 00:44 (12 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:44 (12 मार्च) – 02:14 (12 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:14 (12 मार्च) – 03:44 (12 मार्च)
  • लाभ(शुभ)03:44 (12 मार्च) – 05:15 (12 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:15 (12 मार्च) – 06:45 (12 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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