पंचांग 5 अप्रैल 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
5 अप्रैल 2026 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय21:44
चंद्रास्त08:11
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- तुला 17:28 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 12:00 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 14:11 (6 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 00:07 (6 अप्रैल) तक, फिर अनुराधा 02:56 (7 अप्रैल) तक
- योग
- वज्र 14:43 तक, फिर सिद्धि 15:25 (6 अप्रैल) तक
- करण
- विष्टि 12:00 तक, फिर बव 01:03 (6 अप्रैल) तक, फिर बालव 14:11 (6 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02
- राहु काल17:16 – 18:49
- यमगंड12:37 – 14:10
- गुलिक काल15:43 – 17:16
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:58
- चर(सामान्य)07:58 – 09:31
- लाभ(शुभ)09:31 – 11:04
- अमृत(शुभ)11:04 – 12:37
- काल(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:10
- शुभ(शुभ)14:10 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:16
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:16 – 18:49
रात
- शुभ(शुभ)18:49 – 20:16
- अमृत(शुभ)20:16 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:10
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:10 – 00:37 (6 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:37 (6 अप्रैल) – 02:03 (6 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)02:03 (6 अप्रैल) – 03:30 (6 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:30 (6 अप्रैल) – 04:57 (6 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)04:57 (6 अप्रैल) – 06:24 (6 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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