पंचांग 17 अप्रैल 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 अप्रैल 2026 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:16
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:50
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मीन 12:02 तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 17:21 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 14:11 (18 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- रेवती 12:02 तक, फिर अश्विनी 09:42 (18 अप्रैल) तक
- योग
- वैधृति 07:21 तक, फिर विष्कम्भ 03:45 (18 अप्रैल) तक, फिर प्रीति 23:56 (18 अप्रैल) तक
- करण
- चतुष्पद 06:50 तक, फिर नाग 17:21 तक, फिर किंस्तुघ्न 03:48 (18 अप्रैल) तक, फिर बव 14:11 (18 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
- राहु काल10:59 – 12:34
- यमगंड15:43 – 17:17
- गुलिक काल07:50 – 09:25
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:16 – 07:50
- लाभ(शुभ)07:50 – 09:25
- अमृत(शुभ)09:25 – 10:59
- काल(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:34
- शुभ(शुभ)12:34 – 14:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:17
- चर(सामान्य)17:17 – 18:52
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:52 – 20:17
- काल(वर्जित (परंपरा))20:17 – 21:42
- लाभ(शुभ)21:42 – 23:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:33 (18 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)00:33 (18 अप्रैल) – 01:59 (18 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)01:59 (18 अप्रैल) – 03:24 (18 अप्रैल)
- चर(सामान्य)03:24 (18 अप्रैल) – 04:50 (18 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:50 (18 अप्रैल) – 06:15 (18 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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