पंचांग 20 अप्रैल 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 अप्रैल 2026 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:14
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय08:19
चंद्रास्त22:11
मास:
वैशाख (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 07:27 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 04:15 (21 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल पंचमी 01:20 (22 अप्रैल) तक
नक्षत्र
रोहिणी 02:08 (21 अप्रैल) तक, फिर मृगशीर्ष 23:58 (21 अप्रैल) तक
योग
सौभाग्य 16:11 तक, फिर शोभन 12:31 (21 अप्रैल) तक
करण
गर 07:27 तक, फिर वणिज 17:50 तक, फिर विष्टि 04:15 (21 अप्रैल) तक, फिर बव 14:45 (21 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:58
  • राहु काल07:49 – 09:24
  • यमगंड10:58 – 12:33
  • गुलिक काल14:08 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:14 – 07:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:49 – 09:24
  • शुभ(शुभ)09:24 – 10:58
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:58 – 12:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:33 – 14:08
  • चर(सामान्य)14:08 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:18
  • अमृत(शुभ)17:18 – 18:52

रात

  • चर(सामान्य)18:52 – 20:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:17 – 21:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:08
  • लाभ(शुभ)23:08 – 00:33 (21 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:33 (21 अप्रैल) – 01:58 (21 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)01:58 (21 अप्रैल) – 03:23 (21 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)03:23 (21 अप्रैल) – 04:48 (21 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)04:48 (21 अप्रैल) – 06:13 (21 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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