पंचांग 11 जुलाई 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 जुलाई 2026 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:04
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय03:25 (12 जुल॰)
चंद्रास्त16:13
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 02:04 (12 जुल॰) तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 22:30 (12 जुल॰) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 11:03 तक, फिर रोहिणी 08:29 (12 जुल॰) तक
योग
गण्ड 00:05 (12 जुल॰) तक, फिर वृद्धि 20:06 (12 जुल॰) तक
करण
कौलव 15:46 तक, फिर तैतिल 02:04 (12 जुल॰) तक, फिर गर 12:18 (12 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06
  • राहु काल09:22 – 11:01
  • यमगंड14:18 – 15:57
  • गुलिक काल06:04 – 07:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:04 – 07:43
  • शुभ(शुभ)07:43 – 09:22
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:22 – 11:01
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:40
  • चर(सामान्य)12:40 – 14:18
  • लाभ(शुभ)14:18 – 15:57
  • अमृत(शुभ)15:57 – 17:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:36 – 19:15

रात

  • लाभ(शुभ)19:15 – 20:36
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:36 – 21:57
  • शुभ(शुभ)21:57 – 23:18
  • अमृत(शुभ)23:18 – 00:40 (12 जुल॰)
  • चर(सामान्य)00:40 (12 जुल॰) – 02:01 (12 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:01 (12 जुल॰) – 03:22 (12 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:22 (12 जुल॰) – 04:44 (12 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)04:44 (12 जुल॰) – 06:05 (12 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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