पंचांग 29 अगस्त 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
29 अगस्त 2026 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:51
चंद्रोदय19:36
चंद्रास्त07:06
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- कुंभ 21:37 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा 09:57 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 09:37 (30 अग॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 03:42 (30 अग॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 03:45 (31 अग॰) तक
- योग
- सुकर्मा 06:36 तक, फिर धृति 05:21 (30 अग॰) तक, फिर शूल 03:46 (31 अग॰) तक
- करण
- कौलव 09:57 तक, फिर तैतिल 21:51 तक, फिर गर 09:37 (30 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00
- राहु काल09:27 – 11:01
- यमगंड14:09 – 15:43
- गुलिक काल06:19 – 07:53
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:19 – 07:53
- शुभ(शुभ)07:53 – 09:27
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:01
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:35
- चर(सामान्य)12:35 – 14:09
- लाभ(शुभ)14:09 – 15:43
- अमृत(शुभ)15:43 – 17:17
- काल(वर्जित (परंपरा))17:17 – 18:51
रात
- लाभ(शुभ)18:51 – 20:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:17 – 21:43
- शुभ(शुभ)21:43 – 23:09
- अमृत(शुभ)23:09 – 00:35 (30 अग॰)
- चर(सामान्य)00:35 (30 अग॰) – 02:01 (30 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:01 (30 अग॰) – 03:27 (30 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (30 अग॰) – 04:53 (30 अग॰)
- लाभ(शुभ)04:53 (30 अग॰) – 06:19 (30 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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