पंचांग 7 सितंबर 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
7 सितंबर 2026 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय03:19 (8 सित॰)
चंद्रास्त15:56
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- मिथुन 12:38 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 17:04 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 14:43 (8 सित॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 18:14 तक, फिर पुष्य 16:39 (8 सित॰) तक
- योग
- व्यतीपात 06:41 तक, फिर वरीयान 03:38 (8 सित॰) तक, फिर परिघ 00:40 (9 सित॰) तक
- करण
- बालव 17:04 तक, फिर कौलव 03:53 (8 सित॰) तक, फिर तैतिल 14:43 (8 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:57
- राहु काल07:53 – 09:26
- यमगंड10:59 – 12:32
- गुलिक काल14:05 – 15:38
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:20 – 07:53
- काल(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:26
- शुभ(शुभ)09:26 – 10:59
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:32
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 14:05
- चर(सामान्य)14:05 – 15:38
- लाभ(शुभ)15:38 – 17:11
- अमृत(शुभ)17:11 – 18:44
रात
- चर(सामान्य)18:44 – 20:11
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:11 – 21:38
- काल(वर्जित (परंपरा))21:38 – 23:05
- लाभ(शुभ)23:05 – 00:32 (8 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:32 (8 सित॰) – 01:59 (8 सित॰)
- शुभ(शुभ)01:59 (8 सित॰) – 03:26 (8 सित॰)
- अमृत(शुभ)03:26 (8 सित॰) – 04:54 (8 सित॰)
- चर(सामान्य)04:54 (8 सित॰) – 06:21 (8 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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