पंचांग 30 दिसंबर 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 दिसंबर 2026 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:05
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय00:35 (31 दिस॰)
चंद्रास्त11:56
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 12:36 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 12:32 (31 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तराफाल्गुनी 15:37 तक, फिर हस्त 16:13 (31 दिस॰) तक
- योग
- सौभाग्य 13:41 तक, फिर शोभन 12:26 (31 दिस॰) तक
- करण
- बव 12:36 तक, फिर बालव 00:29 (31 दिस॰) तक, फिर कौलव 12:32 (31 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 12:59परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:36 – 13:59
- यमगंड08:28 – 09:51
- गुलिक काल11:14 – 12:36
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:05 – 08:28
- अमृत(शुभ)08:28 – 09:51
- काल(वर्जित (परंपरा))09:51 – 11:14
- शुभ(शुभ)11:14 – 12:36
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:36 – 13:59
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:59 – 15:22
- चर(सामान्य)15:22 – 16:45
- लाभ(शुभ)16:45 – 18:07
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:07 – 19:45
- शुभ(शुभ)19:45 – 21:22
- अमृत(शुभ)21:22 – 22:59
- चर(सामान्य)22:59 – 00:37 (31 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (31 दिस॰) – 02:14 (31 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:14 (31 दिस॰) – 03:51 (31 दिस॰)
- लाभ(शुभ)03:51 (31 दिस॰) – 05:29 (31 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:29 (31 दिस॰) – 07:06 (31 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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