पंचांग 3 जनवरी 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 जनवरी 2027 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:10
चंद्रोदय04:08 (4 जन॰)
चंद्रास्त14:29
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- तुला 15:00 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 16:08 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 18:16 (4 जन॰) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 21:37 तक, फिर अनुराधा 00:15 (5 जन॰) तक
- योग
- धृति 11:37 तक, फिर शूल 12:03 (4 जन॰) तक
- करण
- बालव 16:08 तक, फिर कौलव 05:09 (4 जन॰) तक, फिर तैतिल 18:16 (4 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:00
- राहु काल16:47 – 18:10
- यमगंड12:38 – 14:01
- गुलिक काल15:24 – 16:47
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:07 – 08:30
- चर(सामान्य)08:30 – 09:53
- लाभ(शुभ)09:53 – 11:15
- अमृत(शुभ)11:15 – 12:38
- काल(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:01
- शुभ(शुभ)14:01 – 15:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:24 – 16:47
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:47 – 18:10
रात
- शुभ(शुभ)18:10 – 19:47
- अमृत(शुभ)19:47 – 21:24
- चर(सामान्य)21:24 – 23:01
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:01 – 00:39 (4 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:39 (4 जन॰) – 02:16 (4 जन॰)
- लाभ(शुभ)02:16 (4 जन॰) – 03:53 (4 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:53 (4 जन॰) – 05:30 (4 जन॰)
- शुभ(शुभ)05:30 (4 जन॰) – 07:07 (4 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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