पंचांग 3 मार्च 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 मार्च 2027 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:52
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदय04:06 (4 मार्च)
चंद्रास्त14:29
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- धनु 05:20 (4 मार्च) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 07:24 (4 मार्च) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 22:34 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 01:36 (5 मार्च) तक
- योग
- व्यतीपात 01:06 (4 मार्च) तक, फिर वरीयान 02:00 (5 मार्च) तक
- करण
- बव 18:05 तक, फिर बालव 07:24 (4 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:10परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:46 – 14:15
- यमगंड08:20 – 09:49
- गुलिक काल11:18 – 12:46
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:52 – 08:20
- अमृत(शुभ)08:20 – 09:49
- काल(वर्जित (परंपरा))09:49 – 11:18
- शुभ(शुभ)11:18 – 12:46
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:12
- लाभ(शुभ)17:12 – 18:40
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:40 – 20:12
- शुभ(शुभ)20:12 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:14
- चर(सामान्य)23:14 – 00:46 (4 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:46 (4 मार्च) – 02:17 (4 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:17 (4 मार्च) – 03:49 (4 मार्च)
- लाभ(शुभ)03:49 (4 मार्च) – 05:20 (4 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:20 (4 मार्च) – 06:51 (4 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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