पंचांग 1 अप्रैल 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 अप्रैल 2027 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय03:22 (2 अप्रैल)
चंद्रास्त14:05
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण दशमी 00:45 (2 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण एकादशी 02:52 (3 अप्रैल) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 09:25 तक, फिर श्रवण 12:16 (2 अप्रैल) तक
योग
शिव 08:52 तक, फिर सिद्ध 09:41 (2 अप्रैल) तक
करण
वणिज 11:33 तक, फिर विष्टि 00:45 (2 अप्रैल) तक, फिर बव 13:52 (2 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03
  • राहु काल14:11 – 15:43
  • यमगंड06:29 – 08:01
  • गुलिक काल09:33 – 11:06

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:29 – 08:01
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:01 – 09:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:33 – 11:06
  • चर(सामान्य)11:06 – 12:38
  • लाभ(शुभ)12:38 – 14:11
  • अमृत(शुभ)14:11 – 15:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
  • शुभ(शुभ)17:15 – 18:48

रात

  • अमृत(शुभ)18:48 – 20:15
  • चर(सामान्य)20:15 – 21:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:10
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:10 – 00:38 (2 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)00:38 (2 अप्रैल) – 02:05 (2 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:05 (2 अप्रैल) – 03:33 (2 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)03:33 (2 अप्रैल) – 05:00 (2 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)05:00 (2 अप्रैल) – 06:28 (2 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें